Hamsfernama
सबको हँसाना लेकिन
कभी किसी पर हसना मत
सबके दुख बाटना
लेकिन
किसी को दुखी मत करना
सबकी राह में दीप जलाना
लेकिन
किसी का दिल मत जलाना
यही जीवन की रीत हैं
जैसा बोओगे वैसा ही पाओगें
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पाप शरीर नही करता
"विचार" करते हैं ....
और
गंगा "विचारों" को नहीं
"शरीर" को धोती है !
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रिश्तो की सिलाई अगर...
भावनाओ से हुई है...
तो टूटना मुश्किल है...
और अगर स्वार्थ से हुई है...
तो टिकना मुश्किल है...
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लोगों का आदर
केवल उनकी शक्ल या सम्पत्ति
के कारण नहीं करना चाहिये
बल्कि
उनकी उदारता
के कारण करना चाहिये
हम सुरज की कद्र
उसकी उँचाई के कारण नहीं करते बल्कि
उसकी उपयोगिता के कारण करते हैं।
आ तः व्यक्ति नहीं व्यक्तित्व
आदरणीय है ।
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"कदर" होती हैं "इंसान" की "जरूरत" पड़ने पर ही,
बिना ज़रूरत के तो "हीरे" भी "तिज़ोरी" में रहते हैं...
रिश्तों को "जेबो" में नहीं,,
हुज़ूर "दिलों" में रखिए...
क्योंकि "वक़्त" से "शातिर",,
कोई "जेबकतरा" नहीं होता.!!!
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ज़रा सी ज़िंदगी है,
अरमान बहुत हैं,
हमदर्द नहीं कोई,
इंसान बहुत हैं,
दिल के दर्द सुनाएं
तो किसको,
जो दिल के करीब है,
वो अनजान बहुत हैं।
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ख्वाहिशें' खत्म नहीं होती
इंसान' की साहब..!!
मौत' के बाद भी
जन्नत' मांगता है...!!!
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क्रोध और आंधी दोनों बराबर होते है.!
शांत होने के बाद ही पता चलता है की कितना नुकसान हुआ है.!
इसलिए हमेशा मुस्कुराते रहिये।
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ऐ ज़िंदगी
मुश्किलों के सदा हल दे,
थक न सके हम,
फुर्सत के कुछ पल दे,
दुआ यही है दिल से
कि सबका हो सुखद आज,
और उस से भी बेहतर कल दे।।
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ये मंजिलें बड़ी जिद्दी होती हैं,
हासिल कहां नसीब से होती हैं।
मगर वहां तूफान भी हार जाते हैं,
जहां कश्तियां जिद्द पे होती हैं !!
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सोच ही
आपको बड़ा बनाती है..!!
यदि 🌹गुलाब 🌹की तरह
खिलना चाहते है तो
काँटों के साथ तालमेल की
कला सीखनी होगी.
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जिन्हें आप खुश देखना चाहते हो उन्हें यही पर सुख देना...
क्योंकि ताजमहल दुनिया ने देखा है मुमताज ने नही....
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छोटी छोटी खुशिया
ही तो जीने का
सहारा बनती हैं,
ख्वाहिशों का क्या?
वो तो
पल पल बदलती हैं।
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*लोग बुराई करे*…
*और आप दुखी हो जाओ*
*लोग तारीफ करे*….
*और आप सुखी हो जाओ*
*मतलब*
*आपके सुख दुख*
*का स्विच लोगो के हाथ मेँ है* ??
*कोशिश करें ये*
*स्विच आपके हाथ में हो।*
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*जिन्होंने आपका संघर्ष देखा है,*
*सिर्फ वही आपकी कामयाबी की कीमत जानते है,*
*अन्यथा*
*औरों के लिए,*
*आपकी किस्मत बहुत अच्छी है....!!!!*
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*पत्थर सदैव हथौड़े की अंतिम*
*चोट से टूटता है,*
*लेकिन इसका यह मतलब नहीं की*
*पहले की सभी चोटें बेकार गई..*
*"सफलता निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है”*
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*छोटी छोटी खुशियाँ*_
*ही तो जीने का*_
_*सहारा बनती हैं,*_
_*ख्वाहिशों का क्या?*_
*वो तो*_
*पल पल बदलती हैं।*
*बेजान चीज़ो को बदनाम करने के*
*तरीके कितने आसान होते है….!*
*लोग सुनते है छुप छुप के बाते ,*
*और कहते है के दीवारो को भी कान होते हैं…*
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*मुस्करा कर देखो तो*
*सारा जहाॅ रंगीन है* ,
*वर्ना भीगी पलको*
*से तो आईना भी*
*धुधंला नजर आता है*
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*दौड़ने दो खुले मैदानों में,*
*इन नन्हें कदमों को जनाब .!*
*जिंदगी बहुत तेज भगाती है,*
*बचपन गुजर जाने के बाद!!*
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*जब रिश्ता नया होता है तो*
*लोग बात करने का बहाना ढूंढते हैं*
*आैर जब वही रिश्ता पुराना हो जाता है तो*
*लोग दूर होने का बहाना ढूंढते हैं*
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*छोटी छोटी खुशियाँ*_
*ही तो जीने का*_
_*सहारा बनती हैं,*_
_*ख्वाहिशों का क्या?*_
*वो तो*_
*पल पल बदलती हैं।*
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*अनुमान" गलत हो सकता हे पर"*
*"अनुभव" कभी गलत नहीं होता*
*क्योंकि...."*
*"अनुमान" हमारे मन की "कल्पना" है*
*और "अनुभव" हमारे जीवन की "सीख" है*
*अच्छा वक़्त उसी का होता हैं..*.
*जो किसी का बुरा नहीं सोचते हैं...*
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*जीत निश्चित हो तो कायर भी लड़ सकते हैं,बहादुर वे कहलाते हैं,*
*जो हार निश्चित हो,फिर भी मैदान नहीं छोड़ते…*
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*एक दिन*
*शिकायत हमें*
*"समय" और "संसार"*
*से नही.....*
*"स्वयं" से होगी*
*कि, ज़िंदगी सामने थी*
*और हम "संसार" में*
*उलझे रहे।*
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*किसी भी रिश्ते को*
*कितनी भी खूबसूरती से*
*क्यों ना बांधा जाए*
*अगर नज़रों में इज्जत*
*और बोलने में लिहाज*
न हो तो वह टूट जाता है़
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जब आप ऊंचाइयों की सीढ़ियां चढ़ रहे हों तो पीछे
छूटे लोगों से अच्छा व्यवहार करें।
क्योंकि उतरते समय ये
सभी रास्ते में फिर मिलेंगे।।
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येक दिन शिकायत हमें
"समय" और "संसार"
से नही.....
"स्वयं" से होगी
कि, ज़िंदगी सामने थी
और हम "संसार" में
उलझे रहे।
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पेड़ कभी भी डाली
काटने से नहीं सुखता,
पेड़ हमेशा जड़ काटने से
सूखता हैं….
वैसे ही इंसान अपने
कर्म से ही नहीं बल्कि अपनी
छोटी सोच और गलत
व्यवहार से हारता हैं..
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किसीने खुब सही कहा है
खुशीयॉ आये जिंदगी मै तो
चख लेना मिठाई समझ कर
जब गम आये तो वो भी
कभी खा लेना दवाई समझ कर
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अगर इंसान छाँव देने वाले
वृक्षों की कद्र ना करें
तो
धूप उसका नसीब बन जाती है
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परीक्षा हमेशा अकेले में होती हैं ,
लेकिन उसका परिणाम सबके सामने होता है
इसलिए कोई भी कर्म करने से पहले ,
परिणाम का जरूर विचार करें
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वृद्ध अतीत में जीता है
इसलिये निराश रहता है.
युवा भविष्य में जीता है
इसलिये परेशान रहता है.
बच्चा वर्तमान में जीता है
इसलिये प्रसन्न रहता है.
इसलिये सदैव वर्तमान मे
जियें और प्रसन्न रहे...!!!
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